Saturday, February 14, 2009

वसंत
हवा में में घुली हुई
यादों की महक
मानो फैल रही है,
धूप को आगोश में लिये
वसंत आवारा
टहलने लगा
घर के दरवाजे पर
झाँकने लगा लुक-छिप
खिड़कियों से अन्दर
रजाई में दुबके
सोये हुए अहसासों को ।

बदलेपन के ऐसे मोड़ प
तुम पास चले आते हो
परायेपन का बन्धन तोड़कर
वसंत के हल्के आहट में
महकती साँसों को
छुपाये हुए
झूठे एकाकीपन की
नर्माहटों में ।

20-01-2009, सुबह 10.20

1 comment:

Maithili Mandan said...

मैथिली युवा लेखन पर संगोष्ठी


दिनांक 16.02.2009 कें मैथिली मंडनक तत्वावधान में 'मैथिली युवा लेखन दशा आ दिशा' विषय पर शहीद भगत सिंह कॉलेज, नई दिल्ली में एक टा संगोष्ठीक आयोजन कयल गेल. एहि अवसर पर देशक विभिन्न भाग स' आयल टटका पीढीक सक्रिय भागीदारी रहल. बनारस से आयल 'नवतुरिया' केर संपादक अरुणाभ, कटिहार (बिहार) से रोहित झा, दिल्ली से अलोक रंजन, मिथिलेश कुमार राय, फिरदौस, धर्मव्रत चौधरी, देवांशु वत्स, सेतु कुमार वर्मा प्रमुख वक्ता छलाह. ऑडियो कोंफ्रेंसिंग के जरिये गाजियाबाद से मैथिली आ हिंदीक प्रख्यात कथाकार - संपादक अनलकांत ( गौरीनाथ ) आ सहरसा सं चर्चित युवा कथाकार - कवि अखिल आनंद सभा स' जुड़लैथ. संगोष्ठीक संचालन युवतम रचनाकार कुमार सौरभ केलैथ. एहि अवसर पर नवतुरक रचनाकार सबहक क्षोभ एकटा पर्चा पर देखल गेल जे सभा में उपस्थित करीब एक सौ रचनाकार पाठकक बीच वितरित कयल गेल.